विधायिकाओं की जवाबदेही और गरिमा पर जोर रहे: विजेन्द्र गुप्ता
दिल्ली आजकल ब्यूरो, दिल्ली
20 January 2026
दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) को संबोधित करते हुए विधायिकाओं की जवाबदेही और गरिमा पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वैधता जवाबदेही के प्रावधानों के अस्तित्व से नहीं बल्कि उनके गंभीर और ईमानदार अनुपालन से तय होती है.

विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि विधायिकाएं केवल प्रक्रियात्मक संस्थाएं नहीं हैं बल्कि लोकतांत्रिक शासन की सबसे प्रत्यक्ष और सशक्त अभिव्यक्ति हैं. उन्होंने कहा कि विधायिकाएं जनता और उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच एक जीवंत और गतिशील संबंध हैं. जो लोकतंत्र की नैतिक और संवैधानिक आधारशिला है.
विजेन्द्र गुप्ता ने विधानसभाओं की बैठकों की घटती संख्या और प्रभावी कार्य घंटों में कमी पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि इससे कार्यपालिका की निगरानी कमजोर होती है. सदस्यों को जनहित के मुद्दे उठाने के अवसर सीमित होते हैं और विधायिकाओं की केंद्रीय भूमिका तथा प्रभावशीलता धीरे-धीरे क्षीण होती है.

विजेन्द्र गुप्ता ने संविधान के उस प्रावधान को रेखांकित किया जिसके अनुसार प्रत्येक सदन को कम से कम छह माह में एक बार अवश्य बैठक करनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि जवाबदेही केवल प्रतीकात्मक या औपचारिक नहीं हो सकती है बल्कि इसे नियमित बैठकों, अनुशासित आचरण तथा सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों द्वारा सार्थक विमर्श के माध्यम से सजीव रूप में प्रदर्शित किया जाना चाहिए.