दिल्ली आजकल ब्यूरो, दिल्ली
1 August 2026
दिल्ली सरकार ने 1 अगस्त से महिलाओं को हर महीने 2500 रूपए देने की योजना के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है. सीएम ने ऐलान किया है कि रक्षाबंधन के दिन पात्र महिलाओं के खाते में पहली किस्त भेज दी जाएगी. लेकिन सरकार की तरफ से लगाई गई 4 बड़ी शर्तों की वजह से इस योजना पर ही सवाल खड़े हो गए हैं. आलोचकों का कहना है कि इन शर्तों के चलते मुश्किल से 1% महिलाओं को ही इसका लाभ मिल पाएगा.

कौन होंगी पात्र? सरकार ने रखी ये 4 शर्तें
सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक रजिस्ट्रेशन के लिए ये योग्यता जरूरी होगी:
- आय सीमा: जिस परिवार की सालाना आय 2.5 लाख से ज्यादा है, उस घर की महिला अपात्र मानी जाएगी
- पेंशन: जो महिला पहले से किसी भी तरह की सरकारी पेंशन ले रही है, उसे लाभ नहीं मिलेगा
- वाहन: जिसके घर में कोई भी चार पहिया या दो पहिया वाहन रजिस्टर्ड है, वह महिला इस योजना से बाहर रहेगी।
- निवास: महिला को पिछले 10 साल से लगातार दिल्ली में रहना अनिवार्य है.
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है और पोर्टल व कैंपों के जरिए आवेदन लिए जा रहे हैं
वादे और हकीकत में फर्क
इसी मुद्दे पर सियासत भी गरमा गई है. विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में कहा था कि “दिल्ली की प्रत्येक महिला को 2500 रुपए हर महीने दिए जाएंगे.
अब जब शर्तें सामने आईं तो विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपने वादे से मुकर रही है. “प्रत्येक महिला” की जगह अब आय, वाहन और पेंशन की फिल्टरिंग लगा दी गई है.
सबसे बड़ा सवाल: क्या 2.5 लाख वाली लाइन सही है?
आलोचकों ने आय सीमा को सबसे बड़ी अड़चन बताया है. उनका तर्क है कि दिल्ली में न्यूनतम वेतन ही करीब 20,000 महीना है. अगर एक घर में पति-पत्नी दोनों कमाते हैं तो उनकी सालाना आय आसानी से 4.8 लाख हो जाती है. ऐसे में जरूरतमंद परिवार भी इस दायरे से बाहर हो जाएगा.
आर्थिक जानकारों का कहना है कि महंगाई वाले शहर में 2.5 लाख की सीमा बहुत कम है. इसी वजह से अनुमान लगाया जा रहा है कि इन शर्तों के बाद पात्र महिलाओं की संख्या बेहद कम, करीब 1% ही रह जाएगी.
अब सरकार का कहना है कि योजना का मकसद “वास्तविक जरूरतमंद” महिलाओं तक मदद पहुंचाना है, इस वजह से शर्तें जरूरी हैं. वहीं, विपक्ष मांग कर रहा है कि या तो आय सीमा बढ़ाई जाए या फिर चुनाव के समय किए वादे के मुताबिक सभी महिलाओं को लाभ दिया जाए.