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आईसीएआई ने सहकारी इकोसिस्टम को सशक्त करने के लिए ‘कोऑपरेटिव चिंतन शिविर’ का आयोजन किया

दिल्ली आजकल ब्यूरो, दिल्ली
13 January 2026

द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने अपनी कमेटी ऑन कमर्शियल लॉज़, इकोनॉमिक एडवाइजरी एवं एनपीओ कोऑपरेटिव के माध्यम से कोऑपरेटिव चिंतन शिविर का आयोजन किया. यह मंच सहकारी क्षेत्र को सशक्त बनाने तथा भारत के आर्थिक विकास में उसके योगदान को मजबूत करने में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की बढ़ती भूमिका पर गहन विचार-विमर्श के लिए समर्पित रहा. कार्यक्रम में शासन, वित्तीय प्रबंधन, अनुपालन, ऑडिट एवं परामर्श सेवाओं जैसे क्षेत्रों में पेशेवर विशेषज्ञता के माध्यम से सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया.

“चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की विस्तारित भूमिका के माध्यम से भारत के आर्थिक भविष्य का रूपांतरण” विषय के अंतर्गत आयोजित इस चिंतन शिविर में सहकारी संस्थाओं को बदलते नियामकीय ढांचे के अनुरूप ढलने, वित्तीय अनुशासन मजबूत करने और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने में पेशे की अहम भूमिका को रेखांकित किया गया.

कार्यक्रम का उद्घाटन भूपेंद्र यादव, केंद्रीय मंत्री (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन), कृष्ण पाल गुर्जर, केंद्रीय राज्य मंत्री (सहकारिता) तथा सुरेश प्रभु, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं ऋषिहूड विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलाधिपति द्वारा किया गया. यह कार्यक्रम सीए. चरणजोत सिंह नंदा, अध्यक्ष, आईसीएआई और सीए. प्रसन्न कुमार डी, उपाध्यक्ष, आईसीएआई की उपस्थिति में आयोजित हुआ. इस अवसर पर सीए. अभय छाजेड़, अध्यक्ष, सीसीएलईएएनसी तथा सीए. प्रमोद जैन, उपाध्यक्ष, सीसीएलईएएनसी भी उपस्थित रहे.

इस अवसर पर भूपेंद्र यादव ने कहा,“चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और नैतिक आचरण के माध्यम से जनविश्वास बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पेशेवर शासन, समयबद्ध ऑडिट, सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन और प्रौद्योगिकी-आधारित प्रणालियों के माध्यम से सहकारी संस्थाओं को सशक्त करना अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करेगा, समुदायों के भीतर आर्थिक मूल्य को बनाए रखेगा और समावेशी व सतत आर्थिक विकास को समर्थन देगा.”

कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा,“सहकारी संस्थाएं भारत के आर्थिक विकास की प्रमुख प्रेरक शक्ति के रूप में उभर रही हैं. शासन और वित्तीय प्रबंधन में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की विशेषज्ञता इन संस्थाओं को सशक्त कर सकती है, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कर सकती है तथा समुदायों को समावेशी और सतत विकास का लाभ दिला सकती है.”

सुरेश प्रभु ने कहा,“सहकारी क्षेत्र में भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने की अपार संभावनाएं हैं. चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अपने कौशल, अनुशासन और नैतिक मानकों के माध्यम से इन संस्थाओं को सशक्त करते हैं. पारदर्शी और जवाबदेह शासन सुनिश्चित कर सीए सहकारिताओं को व्यक्तियों और समुदायों तक ठोस लाभ पहुंचाने में मदद कर सकते हैं. ”

सीए. चरणजोत सिंह नंदा, अध्यक्ष, आईसीएआई ने कहा,“चार्टर्ड अकाउंटेंट्स नैतिकता का पालन करते हुए और विकास को सक्षम बनाकर हर क्षेत्र को मजबूत बना रहे हैं. 2014 से आईसीएआई विशेष प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, एकरूप ऑडिट ढांचे और सतत क्षमता निर्माण के माध्यम से सहकारी क्षेत्र को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.”

सीए. प्रसन्न कुमार डी, उपाध्यक्ष, आईसीएआई ने कहा,“आईसीएआई सदैव ईमानदारी, पेशेवर उत्कृष्टता और जनसेवा के मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध रहा है. सहकारी संस्थाओं को सशक्त कर, सुशासन और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देकर हमारे सदस्य समुदायों के विकास में अहम योगदान दे सकते हैं.”

कार्यक्रम के दौरान भारत के सहकारी इकोसिस्टम को सशक्त करने पर आधारित अवधारणा पत्र (कांसेप्ट पेपर) का विमोचन भी किया गया. चिंतन शिविर का समापन भारत के सहकारी क्षेत्र को सशक्त, पारदर्शी और पेशेवर रूप से शासित बनाने हेतु व्यावहारिक सुझावों और नीतिगत विचारों के साथ हुआ.

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