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…तो देश में बंद हो जाएगी सीमलेस टयूब इंडस्ट्री, बेरोजगार हो जाएंगे हजारों

दिल्ली आजकल ब्यूरो, दिल्ली
31 January 2026

भारत में सीमलेस टयूब उत्पादन करने वाले उदयोगों की संस्था सीमलेस टयूब मैन्युफैक्चर्स एसोसियेशन आफॅ इंडिया ने सरकार से मांग की है कि इस बजट में उनकी इंडस्ट्री को बचाने के लिए सरकार उचित ऐलान करें.

एसोसियेशन ने कहा है कि अगर सरकार की ओर से मदद नहीं मिलती है तो इसका सीमलेस टयूब इंडस्ट्री पर प्रतिकूल असर होगा. इससे देश में हजारों मजदूरों का रोजगार और इस इंडस्ट्री का कारोबार पूरी तरह से ठप हो सकता है.

सीमलेस टयूब मैन्युफैक्चर्स एसोसियेशन आफॅ इंडिया के अध्यक्ष शिव कुमार सिंघल ने कहा कि चीन से सस्ती दर पर सीमलेस टयूब पाइप भारत में आसानी से उपलब्ध हो रहा है. कई बार वह उस दर पर मिल जाते हैं. जिस पर भारतीय उत्पादक इसे बनाते हैं. जिससे उनका उपयोग बढ़ रहा है. सरकार से हमारी मांग है कि चीन के सीमलेस टयूब उत्पाद पर समयोचित एंटी डंपिंग डयूटी लगाई जाए. चीन के इस उत्पाद पर कहने के लिए एंटी डंपिंग डयूटी है. लेकिन यह वर्ष 2014 की दर पर है. जबकि इस समय वर्ष 2026 चल रहा है. जिससे चीन से आने वाला उत्पाद रूक नहीं रहा है.

एसोसियेशन के कोषाध्यक्ष हेमंत मटरेजा ने कहा कि सीमलेस टयूब इंडस्ट्री का लगभग 50 प्रतिशत उत्पादन महाराष्ट्र में होता है. यही वजह है कि इस इंडस्ट्री पर सबसे अधिक असर भी वहां पर हो रहा है. चीन में सरकार इस इंडस्ट्री को अपनी ओर से विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार 10—15 प्रतिशत का समर्थन उपलब्ध कराती है. जिससे ये भारत में उनके उत्पादन की दर से भी सस्ती दर पर मिलता है. इस समय देश में करीब 10—11 लाख टन सीमलेस टयूब की खपत है. जबकि भारतीय उत्पादक करीब 15—16 लाख टन का उत्पादन करते हैं. वहीं, चीन से करीब 3.5—4 लाख टन आता है. जिससे घरेलू उत्पादक बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गए हैं. अगर सरकार ने जल्द एंटी डंपिंग डयूटी को आज की दर पर नहीं किया. इसके अलावा इंडस्ट्री को अलग से कोई प्रोत्साहन नहीं दिया तो इस इंडस्ट्री पर संकट आ सकता है. जिसका सबसे अधिक असर महाराष्ट्र में होगा. इसकी वजह यह है कि वहां पर 50 प्रतिशत से अधिक उत्पादन होता है. इसके अलावा गुजरात, आंध्र प्रदेश और हरियाणा पर भी इसका असर होगा.

हेमंत मटरेजा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया आहवान से प्रभावित होकर हमारी इंडस्ट्री ने पहली बार मेक इन इंडिया आक्सीजन सिलेंडर, सीएलजी सिलेंडर, ड्रील पाइप , सब—सी पाइप भी भारत में बनाए. उसके बाद भी इस इंडस्ट्री की मांग पर कोई कदम नहीं उठाया गया है. एसोसियेशन के अध्यक्ष शिव कुमार सिंघल के नेतृत्व में हमारा प्रतिनिधिमंडल वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से लेकर कई अधिकारियों से भी मिला है. हम उम्मीद करते हैं कि सरकार इस इंडस्ट्री को बजट में राहत देगी.

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