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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र स्थापना दिवस पर चीन—पाक को एक साथ दिखाया आईना

दिल्ली आजकल ब्यूरो, दिल्ली
25 October 2025

विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र का स्थापना दिवस मनाया. जिसमें विभिन्न देशों के राजदूत और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. इस अवसर पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद और उसके समर्थन के मुददे पर पाकिस्तान और चीन को आईना दिखाने का कार्य किया. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में सुधार को समय की जरूरत करार देते हुए कहा कि यह अपने कार्य में असफल होता दिख रहा है. यहां पर बहुपक्षवाद अब नजर नहीं आता है. इस अवसर पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र के 80 वर्ष होने पर एक स्मारक टिकट भी जारी किया.

चीन पर परोक्ष हमला करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक सदस्य खुलेआम उस संगठन का बचाव करता है. जो पहलगाम में बर्बर आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी लेता है. इससे संयुक्त राष्ट्र की बहुपक्षवाद की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं. इस तरह के कदम को निंदनीय करार देते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद के पीड़ितों और गुनहगारों को वैश्विक रणनीति के नाम पर एक समान करार नहीं दिया जा सकता है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत का मुददा फिर उठाते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति में यह आवश्यक है. उन्होंने भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए पाक पर भी परोक्ष हमला किया.

उन्होंने कहा कि हमें यह मानना होगा कि संयुक्त राष्ट्र में सभी कुछ ठीक नहीं है. संयुक्त राष्ट्र के फैसले लेने का तरीका ना तो उसके सभी सदस्य देशों की सही नुमाइंदगी करता है और ना ही वह दुनिया की मुख्य जरूरतों पर ध्यान दे रहा है. संयुक्त राष्ट्र में होने वाली बहसें अब बहुत ज्यादा बटी हुई हैं. उसका कामकाज स्पष्ट तौर पर रुका हुआ नजर आ रहा है. आतंकवाद के प्रति इसकी प्रतिक्रिया विश्वसनीयता की कमियों को उजागर करती है.

विदेश मंत्री ने कहा कि बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता में कितनी भी गडबड़ी हो. लेकिन यह विश्वास मजबूत बना रहना चाहिए. दुनिया के देश संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करें और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में हमारे विश्वास को नवीनीकृत किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज के दौर में हम कई विवाद देख रहे हैं. यह दुख की बात है. ये विवाद केवल मानव जीवन पर ही प्रभाव नहीं डाल रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है. लेकिन विकसित देश ने स्वयं को इन मुसीबतों से बचा लिया है. जबकि ग्लोबल साउथ इसकी पीड़ा को महसूस कर रहा है. सतत विकास लक्ष्य 2030 की धीमी गति वैश्विक दक्षिण के संकट को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है. उन्होने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में बदलाव इस समय की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने शांति और सुरक्षा के साथ-साथ विकास और प्रगति के आदर्शों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि भारत हमेशा से संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षवाद का प्रबल समर्थक रहा है और आगे भी रहेगा.

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